NA-7 आँवला एक उन्नत और उच्च उत्पादकता वाली संकर किस्म है जिसे विशेष रूप से औषधीय, व्यावसायिक और प्रसंस्करण के लिए तैयार किया गया है। यह किस्म फलों के बड़े आकार, कम बीज प्रतिशत और विटामिन C की अत्यधिक मात्रा के लिए प्रसिद्ध है। यह किस्म चकैया की तुलना में अधिक उपज देती है और प्रसंस्करण उद्योग के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
NA-7 किस्म की फलियों की त्वचा चिकनी होती है और इसका गूदा मोटा एवं रेशे रहित होता है। यह किस्म सूखा सहन करने की क्षमता रखती है और भारत के अधिकांश भागों में सफलतापूर्वक उगाई जाती है।
🌿 रोपण एवं देखभाल के सुझाव (Planting Care Tips)
स्थान: धूप वाली खुली जगह में लगाएं
मिट्टी: दोमट, गहरी और उपजाऊ मिट्टी जिसमें जलनिकासी अच्छी हो
गड्ढा: 2×2 फीट, वर्मी कम्पोस्ट व गोबर खाद मिलाकर भरें
दूरी: 10×10 फीट (320 पौधे प्रति एकड़)
सिंचाई: प्रारंभिक अवस्था में 7–10 दिन में एक बार
खाद: हर 6 माह में जैविक खाद डालें
कीट नियंत्रण: नीम तेल या ट्राइकोडर्मा आधारित जैविक छिड़काव
🌾 आँवला की खेती के मुख्य पहलू (Key Aspects of Amla Cultivation)
🌦️ जलवायु और मिट्टी (Climate and Soil)
शुष्क और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए उत्तम
पीएच 6.5 से 8.5 तक की दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त
🌱 किस्म चयन (Variety Selection)
NA-7 की विशेषता – अधिक उत्पादन, बड़े फल, औषधीय गुण
🌿 रोपण (Planting)
मानसून के बाद या फरवरी–मार्च में रोपण करें
पौधों के साथ जीवाणु कल्चर व ट्राइकोडर्मा का प्रयोग करें
🌳 बाग प्रबंधन (Orchard Management)
समय-समय पर निराई-गुड़ाई
जैविक टॉनिक और पंचगव्य का प्रयोग उपज बढ़ाने हेतु
🍈 तुड़ाई और प्रसंस्करण (Harvesting & Handling)
2.5 – 3 वर्ष में फल देना प्रारंभ
अक्टूबर–नवंबर में तुड़ाई
अचार, मुरब्बा, जूस और आयुर्वेदिक दवाओं के लिए सर्वोत्तम
🌿 हाई डेंसिटी प्लांटेशन (High-Density Planting)
प्रति एकड़ 400 पौधे तक संभव
ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से उत्पादन में वृद्धि
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