लंगड़ा आम की गिनती भारत के सर्वश्रेष्ठ पारंपरिक आमों में होती है। इसकी उत्पत्ति उत्तर प्रदेश के बनारस (वाराणसी) क्षेत्र से मानी जाती है। यह आम अपने गहरे हरे रंग, गाढ़े स्वाद और कम रेशे वाले मुलायम गूदे के लिए जाना जाता है। पकने के बाद भी इसका छिलका हरा ही रहता है, जो इसकी खास पहचान है।
🌱 पौधरोपण एवं देखभाल सुझाव (Planting Care Tips):
धूप: 6-8 घंटे की सीधी धूप अनिवार्य
मिट्टी: अच्छी जलनिकासी वाली दोमट मिट्टी
सिंचाई: गर्मियों में प्रति सप्ताह, सर्दियों में आवश्यकता अनुसार
खाद: वर्मी कम्पोस्ट, गोबर खाद और नीम खली मिलाकर उपयोग करें
दूरी: 8–10 फीट पौधों के बीच
🌾 आम की खेती के प्रमुख पहलू (Key Aspects of Mango Cultivation):
📌 जलवायु और मिट्टी (Climate and Soil):
लंगड़ा आम को गर्म जलवायु और 25°C से ऊपर तापमान चाहिए
दोमट मिट्टी जिसमें pH 6–7.5 हो, उपयुक्त रहती है
📌 विविधता चयन (Variety Selection):
लंगड़ा आम को उसकी लंबी शेल्फ लाइफ और स्वाद के कारण पसंद किया जाता है
घरेलू खपत के साथ-साथ यह व्यावसायिक दृष्टिकोण से भी लाभकारी है
📌 रोपण (Planting):
रोपण के लिए आदर्श समय मानसून या बसंत ऋतु
गड्ढों में वर्मी कम्पोस्ट और मिट्टी मिलाकर भरें
📌 बाग प्रबंधन (Orchard Management):
समय पर कटाई-छंटाई करें
जैविक कीटनाशकों से कीट नियंत्रण करें
📌 कटाई और बाद की प्रक्रिया (Harvesting & Post-Harvest Handling):
आम पकने के 90 दिन बाद तोड़े
संग्रहण के लिए छायादार जगह में रखें
📌 हाई डेंसिटी प्लांटेशन (High-Density Planting):
5 x 5 मीटर दूरी पर हाई डेंसिटी रोपण किया जा सकता है
प्रति एकड़ अधिक उपज प्राप्त होती है
📈 लंगड़ा आम की प्रमुख विशेषताएं:
विशेषता
विवरण
फल का रंग
पकने पर भी गाढ़ा हरा
स्वाद
अत्यधिक मीठा और सुगंधित
गूदा
बहुत कम रेशा, मुलायम और स्वादिष्ट
औसत उपज
प्रति पेड़ 250–300 फल प्रतिवर्ष
उपयोग
ताजा सेवन, रस, अचार, निर्यात
मांग
उत्तर भारत में अत्यधिक लोकप्रिय
📢 पंचलाइन (Punchlines):
“हर काट में बनारस की मिठास – यही है लंगड़ा आम!”
“पारंपरिक स्वाद का शाही अनुभव – लंगड़ा लगाएं, लंगड़ा खाएं!”
“हरा आम, मीठा गूदा – लंगड़ा का कोई जवाब नहीं!”
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